Ranji Trophy Final:67 साल में पहली बार खिताब जीतने के करीब जम्मू-कश्मीर, किस तरह मुश्किल हुई कर्नाटक की राह? - Karnataka Vs Jammu And Kashmir Ranji Trophy Elite 2025-26 Final Day 4 Highlights And Match Reports

Ranji Trophy Final:67 साल में पहली बार खिताब जीतने के करीब जम्मू-कश्मीर, किस तरह मुश्किल हुई कर्नाटक की राह? - Karnataka Vs Jammu And Kashmir Ranji Trophy Elite 2025-26 Final Day 4 Highlights And Match Reports

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आकिब नबी डार की अगुआई में गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन से जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक पर शिकंजा कस लिया है। रणजी ट्रॉफी फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में दबदबा बनाया और बढ़त हासिल की। इसके बाद टीम ने दूसरी पारी में सधी हुई बल्लेबाजी से खिताब की ओर कदम बढ़ा दिए। जम्मू-कश्मीर के पहली पारी के 584 रनों के जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन पर सिमट गई। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

जम्मू-कश्मीर ने नहीं दिया फॉलोऑन

 
जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रन की बढ़त हासिल करने के बावजूद फॉलोऑन नहीं करने का फैसला किया और दूसरी पारी में चार विकेट पर 186 रन बना लिए। इस तरह टीम की कुल बढ़त 477 रन हो गई है और खिताब पर उसका कब्जा लगभग पक्का हो गया है। शनिवार को फाइनल मैच का पांचवां दिन है और नतीजा नहीं निकलने की स्थिति में जम्मू-कश्मीर की टीम पहली पारी में बढ़त के आधार पर मुकाबला अपने नाम कर लेगी। विज्ञापन विज्ञापन

मयंक के अलावा कर्नाटक का कोई बल्लेबाज नहीं चला

सलामी बल्लेबाज कमरान इकबाल दिन का खेल समाप्त होने तक 94 रन बनाकर नाबाद थे, जबकि साहिल लोटरा 16 रन पर नाबाद हैं। कर्नाटक की बल्लेबाजी जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों के सामूहिक प्रयास के सामने फीकी साबित हुई। अनुभवी सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल के जुझारू 160 रन को छोड़कर मेजबान टीम का कोई भी बल्लेबाज उल्लेखनीय योगदान नहीं दे सका। तीसरे दिन अपनी रफ्तार से सितारों से सजी घरेलू टीम को झकझोरने वाले भारत के उभरते तेज गेंदबाज आकिब नबी ने 23 ओवर में 54 रन देकर पांच विकेट के साथ इस सत्र में अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखा। उनके प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को भी प्रभावित किया है। 

जम्मू-कश्मीर के लिए आसान नहीं रहा सफर

जम्मू कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था और तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था। जम्मू कश्मीर ने इस सत्र से पहले 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से उसने केवल 45 जीते थे। उसे अपनी पहली जीत दर्ज करने में 44 साल लग गए, जो उसने 1982-83 में सेना के खिलाफ हासिल की थी। उसके लिए नॉकआउट में पहुंचना कभी आसान नहीं रहा लेकिन 2013-14 में उसे एक बड़ी सफलता मिली जब उसने नेट रन रेट के आधार पर गोवा को पीछे छोड़कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। उसने 2015-16 में परवेज रसूल की कप्तानी में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई को हराकर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने अपने विश्वास को परिणामों में तब्दील कर दिया और वह खिताब जीतने के बेहद खरीब है।

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