National Bravery Award:उत्तराखंड में बहादुर बच्चों की कमी नहीं, पर तीन साल से नहीं मिला वीरता पुरस्कार - Uttarakhand Has No Shortage Of Brave Children But No National Bravery Award Has Been Given For Past Three Year

National Bravery Award:उत्तराखंड में बहादुर बच्चों की कमी नहीं, पर तीन साल से नहीं मिला वीरता पुरस्कार - Uttarakhand Has No Shortage Of Brave Children But No National Bravery Award Has Been Given For Past Three Year

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उत्तराखंड में बहादुर बच्चों की कमी नहीं है। इन बच्चों की ओर से दूसरों की जान बचाने के लिए अपना साहस दिखाने के मामले अक्सर आते रहे हैं, इसके बावजूद पिछले करीब तीन साल से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार की सूची से राज्य के बच्चों के नाम गायब हैं। राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव पुष्पा मानस के मुताबिक इन बच्चों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए राज्य बाल कल्याण परिषद की अगली बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।

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प्रदेश में इन दिनों भालू और गुलदार के बढ़ते हमलों को देखते हुए कुछ जिलों में बच्चे स्कूल जाते हुए लाठी व दराती साथ लेकर चल रहे हैं। जो कई बार अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए अपना साहस दिखा चुके हैं। इसके अलावा अन्य मामलों में भी राज्य के बहादुर बच्चे दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहे हैं। भारतीय बाल कल्याण परिषद की ओर से पूर्व में राज्य के इन बहादुर बच्चों को चयनित कर हर साल गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाता रहा है, लेकिन किन्हीं वजहों से पिछले कुछ वर्षों से इसके लिए भारतीय बाल कल्याण परिषद की ओर से आवेदन नहीं मांगे जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में इसके लिए न आवेदन मांगे गए न ही राज्य से इस तरह का कोई प्रस्ताव भेजा गया। विज्ञापन विज्ञापन

राज्य स्तर पर मिले वीरता पुरस्कार
राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव पुष्पा मानस के मुताबिक राज्य में बहादुर बच्चों की कमी नहीं है। विभिन्न अवसरों पर अपना साहस दिखा चुके इन बच्चों को राज्य स्तर पर वीरता पुरस्कार मिलना चाहिए। राज्य बाल कल्याण परिषद की अगली बैठक फरवरी या मार्च में होनी है। इस बैठक में उनकी ओर से इसका प्रस्ताव लाया जाएगा। पुरस्कार की धनराशि के लिए प्रायोजक भी तैयार हैं।

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तब आगे नहीं बढ़ी बात
राज्य बाल कल्याण परिषद की पूर्व में हुई बैठक में राजभवन की ओर से इस तरह के बच्चों को पुरस्कृत किए जाने का मौखिक आश्वासन मिला था। परिषद की ओर से बताया गया कि तब बात आगे नहीं बढ़ी। राज्य बाल कल्याण परिषद में राज्यपाल अध्यक्ष हैं।

उत्तराखंड के इन बच्चों को मिल चुका राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार
देहरादून। राज्य के 15 बहादुर बच्चों को अब तक राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार मिल चुका है। टिहरी गढ़वाल के हरीश राणा को वर्ष 2003, हरिद्वार की माजदा को 2004, अल्मोड़ा की पूजा कांडपाल को 2007, देहरादून के प्रियांशु जोशी को 2010, देहरादून की स्व.श्रुति लोधी को 2010, रुद्रप्रयाग के स्व. कपिल नेगी को 2011, चमोली की स्व.मोनिका उर्फ मनीषा को 2014, देहरादून के लाभांशु को 2014, टिहरी के अर्जुन को 2015, देहरादून के सुमित ममगाई को 2016, टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल को 2017, पौड़ी गढ़वाल की राखी को 2019, नैनीताल के सनी को 2020, पिथौरागढ़ के मोहित चंद उप्रेती को 2020 और रुद्रप्रयाग के नितिन रावत को 2022 में यह पुरस्कार मिल चुका है।

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