Mark Carney India Visit,इधर भारत-ईयू एफटीए फाइनल, उधर आ गई कनाडा से बड़ी खबर, ₹187490000000 का सौदा लेकर पहुंच रहे पीएम - canada pm mark carney india visit c$2.8 billion uranium supply deal expectation - Business headlines News
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ्ते में भारत आने वाले हैं। इस दौरे पर दोनों देशों के बीच ऊर्जा, खनन और टेक्नोलॉजी जैसे बड़े क्षेत्रों में कई अहम समझौते होने की उम्मीद है। सबसे खास बात यह है कि करीब 2.8 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 18749 करोड़ रुपये) का 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता हो सकता है। यह समझौता कनाडा और भारत के बीच परमाणु सहयोग को और मजबूत करेगा। यह जानकारी रॉयटर्स ने सोमवार को दी। कनाडाई पीएम के दौरे की खबर ऐसे समय आई जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से अटके अपने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी कर ली है। 27 जनवरी को इसे लेकर औपचारिक ऐलान होने की उम्मीद है।
कार्नी की यात्रा के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), कच्चा तेल, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर भी बातचीत होगी। इन मुद्दों की लिस्ट बताती है कि दोनों सरकारें दुनिया में बदलती दोस्ती, सप्लाई चेन में रुकावटों और व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को गहरा करने की कोशिश कर रही हैं।
चल रही हैं यात्रा की तैयारियां
कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक ने बताया कि यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। मार्च की शुरुआत में यह दौरा हो सकता है। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि दोनों पक्ष अहम समझौतों को जल्द से जल्द फाइनल करने में लगे हैं। कनाडा के एनर्जी मिनिस्टर टिम हॉजसन का भी इसी समय भारत आना इस द्विपक्षीय बातचीत की अहमियत और तेजी को दिखाता है। पटनायक ने यह भी बताया कि यूरेनियम डील के अलावा, परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस, पर्यावरण, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई छोटे समझौते भी कार्नी के दौरे के दौरान हो सकते हैं।
हालांकि, यूरेनियम डील का अभी तक औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन, हॉजसन ने कहा है कि कनाडा भारत को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के तहत परमाणु ईंधन सप्लाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि भारत एक बड़ा परमाणु ऊर्जा वाला देश है और उसकी नागरिक परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की योजनाएं बहुत बड़ी हैं।' उन्होंने दोहराया कि यूरेनियम का सारा निर्यात इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के सुरक्षा नियमों के मुताबिक होगा, जो कनाडा की परमाणु अप्रसार की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
ये समझौते करने की दिशा में भी हो रहा काम
परमाणु सहयोग के अलावा, दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) और कच्चे तेल व एलएनजी की सप्लाई को लेकर भी समझौते करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हॉजसन ने भारत के साथ करीबी रिश्ते बनाने की रणनीतिक वजहों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी करना चाहता है। भारत खुद भी क्रिटिकल मिनरल्स का एक तेजी से बढ़ता उपभोक्ता है। कनाडा के पास इन खनिजों का बड़ा भंडार और उत्पादन क्षमता है। ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन द्विपक्षीय बातचीत में अहम मुद्दे रहेंगे।
व्यापारिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। मार्च में ही एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना है। पटनायक को भरोसा है कि बातचीत शुरू होने के एक साल के अंदर CEPA फाइनल हो सकता है। इससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। यह नई कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश वैश्विक व्यापार तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ओर से लगाए गए टैरिफ का सामना कर रहे हैं। इससे वे ज्यादा भरोसेमंद और विविध साझेदारियों की तलाश में हैं।
रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश
कार्नी का यह दौरा हाल के वर्षों में कनाडा-भारत संबंधों में आई कूटनीतिक खटास के बाद रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पटनायक ने बताया कि आने वाले महीनों में कई भारतीय मंत्री कनाडा की यात्रा कर सकते हैं। वहीं, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अगले महीने ओटावा का दौरा करेंगे ताकि उच्च-स्तरीय सुरक्षा और खुफिया जानकारी पर बातचीत जारी रखी जा सके। दोनों पक्ष संवेदनशील मुद्दों को स्थापित कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की इच्छा जता चुके हैं।
इन मुलाकातों की जल्दबाजी का कारण तेजी से बदलता वैश्विक माहौल है। पटनायक ने कार्नी के दावोस शिखर सम्मेलन में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि पारंपरिक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर दबाव है। इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे में कनाडा और भारत ऐसे समझौते करना चाहते हैं जो उनकी आपसी आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ाएं।
भारत जहां एक तरफ यूरोपीय संघ जैसे साझेदारों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है। वहीं, यह दौरा आर्थिक रिश्तों को विविध बनाने की एक बड़ी रणनीति को दिखाता है। मार्च की शुरुआत नजदीक आने के साथ ही यूरेनियम, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में ठोस नतीजे लाने पर ध्यान केंद्रित है, जो कनाडा-भारत संबंधों में एक नया अध्याय शुरू कर सकते हैं।