Mahakal Mandir: गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, VIP कल्चर के खिलाफ लगी याचिका - supreme court to hear petition against vip culture on entry of common devotees into the sanctum sanctorum of mahakal temple

Mahakal Mandir: गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, VIP कल्चर के खिलाफ लगी याचिका - supreme court to hear petition against vip culture on entry of common devotees into the sanctum sanctorum of mahakal temple
उज्जैन:

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति न मिलने, जबकि जनप्रतिनिधियों और विशेष अतिथियों को अंदर जाकर पूजा-अर्चना करने की छूट दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। हाई कोर्ट में राहत न मिलने के बाद अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जहां कल यानि मंगलवार को इस पर सुनवाई होगी।


इंदौर निवासी एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि जब मंदिर प्रशासन प्रभावशाली व्यक्तियों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दे रहा है तो फिर आम श्रद्धालुओं को इससे वंचित रखना समानता के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका में सभी श्रद्धालुओं के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।दरअसल, 4 जुलाई 2023 को श्रावण मास के दौरान भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति ने गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। उस समय यह कहा गया था कि सावन समाप्त होते ही व्यवस्था को फिर से शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और नंदी हॉल से ही दर्शन करने पड़ रहे हैं।

भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा का तर्क, वीआईपी सीधे जा रहे गर्भगृह


महाकाल लोक परियोजना के लोकार्पण के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। जहां पहले प्रतिदिन 20 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या डेढ़ से दो लाख तक पहुंच रही है। मंदिर प्रशासन का तर्क रहा है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कारणों से गर्भगृह में प्रवेश सीमित रखा गया है। लेकिन विशेष व्यक्तियों को बिना किसी रोक-टोक के अंदर प्रवेश दिया जाता है।

सांसद और जनप्रतिनिधि भी पत्र लिख चुके


इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधि भी पहले आवाज उठा चुके हैं। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने गर्भगृह खोलने की मांग को लेकर पत्र लिखा था और मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष भी यह विषय रखा था। वहीं हाल ही में उज्जैन के महापौर ने भी दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन कराने की मांग की थी।
Navbharat Timesआग तापते साधु की 'लाइव मौत', पल भर में निकली जान, CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर

कोर्ट ने कलेक्टर पर छोड़ा था मामला


एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने बताया कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर मंदिर प्रशासन द्वारा आम श्रद्धालुओं के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। इसी विषय को लेकर पहले इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जहां इसे व्यक्तिगत मामला बताते हुए खारिज कर दिया गया था और गर्भगृह प्रवेश का निर्णय कलेक्टर पर छोड़ा गया था। उसी आदेश को अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
Navbharat Timesराजसत्ता की देवी मां बगलामुखी का तिरंगे से श्रृंगार, देशभक्ति के रंगों में रंगा द्वापरकालीन सिद्धपीठ

सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई


वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से याचिका दायर की गई है, जिस पर मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉय माल्या बागची की डबल बेंच में सुनवाई होगी। हमें विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय आम श्रद्धालुओं के हित में निर्णय देगा और सभी को समान रूप से अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन व जल अर्पण का अधिकार मिलेगा।

View Original Source