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लोकसभा ने दूसरी बार कहा ‘तीन तलाक’ मंजूर, अब राज्यसभा चुनौती




एक साथ तीन तलाक को अपराध मानने वाला बिल गुरुवार को लोकसभा ने पारित कर दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वॉकआउट के बाद 245 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट दिया। विरोध में 11 वोट पड़े। विपक्ष बिल को जॉइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहा था। इससे पहले, चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि इस बिल का असली मकसद मुस्लिम महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं, मुस्लिम पुरुषों को सजा देना है। लेकिन, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह मुद्दा किसी धर्म या समुदाय से नहीं, इंसाफ से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2017 के बाद से तीन तलाक के 477 केस सामने आ चुके हैं। 12 साल से छोटी बच्ची के दुष्कर्मी को फांसी का बिल सदन एकजुट होकर पारित कर सकता है तो यह बिल क्यों नहीं? मुस्लिम महिला (विवाह में अधिकारों की रक्षा) बिल अब राज्यसभा में जाएगा। यह बिल लोकसभा में दूसरी बार पारित हुआ है।
रविशंकर प्रसाद बोले – बराबरी का हक देगा यह बिल| कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पर करीब साढ़े 4 घंटे चली बहस के जवाब में कहा कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं को सम्मान और बराबरी का हक देता है। इसमें पीड़ित महिला या खून का रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करवाएगा।
बिल पास होते वक्त कई सांसद वॉक आउट कर गए
राजा ने कहा- तीन तलाक बिल मुस्लिम कानून में सीधा दखल नकवी बोले- यह इस्लाम का अंग नहीं, सती प्रथा जैसी बुराई है
विपक्ष
अनवर राजा, अन्नाद्रमुक: यह बिल असंवैधानिक है। इसके निशाने पर एक विशेष समुदाय है और यह मुस्लिम कानून में सीधा दखल है। विवाह सामाजिक अनुबंध है तो तलाक अपराध कैसे हो सकता है। पति जेल गया ताे महिला की देखभाल कौन करेगा?
सुदीप बंदोपाध्याय, टीएमसी: हमारी पार्टी महिलाओं की सुरक्षा के पक्ष में है। हम इस बिल के ज्यादातर हिस्सों से सहमत है लेकिन इसके आपराधिक पहलू को लेकर थोड़ी शंकाएं हैं। यह बिल जॉइंट सेलेक्ट कमेटी को भेजना चाहिए।
असदुदीन ओवैसी, एआईएमआईएम: यह बिल संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ है। विडम्बना है कि देश में समलैंगिकता और व्यभिचार अपराध की श्रेणी से बाहर हो रहे हैं और तलाक अपराध बन रहा है।
खड़गे ने उठाई सेलेक्ट कमेटी की मांग, स्पीकर ने नकारी तीन तलाक बिल पर बहस से पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विस्तृत जांच के लिए यह बिल को जॉइंट सेलेक्ट कमेटी को भेजने की बात कही। इसे स्पीकर सुमित्रा महाजन ने नकार दिया।
ओवैसी और विपक्षी सांसदों ने 13 संशोधन सुझाए, सभी खारिज हुए| एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन तथा बीजद के भर्तृहरि मेहताब ने तीन तलाक बिल में 13 संशोधन पेश किए। लेकिन सदन ने सभी को अस्वीकार कर दिया। विपक्षी दलों के सदस्यों ने 11 संशोधनों पर मतविभाजन भी मांगा लेकिन सभी संशोधन भारी अंतर से गिर गए।
राज्यसभा में यह बिल पारित करवाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती
सत्ता पक्ष
मुख्तार अब्बास नकवी: तीन तलाक इस्लाम का अंग नहीं है, बल्कि सती प्रथा जैसी बुराई है। लगता है कि कुछ लोग पीड़ित के बजाय आरोपी के साथ खड़े हैं। अगर सजा से डरते हैं तो अपराध ही क्यों करते हो? 1986 में शाहबानो केस में कांग्रेस ने जो लम्हों में खता की, उसकी सजा सदियों ने भुगती है।
स्मृति ईरानी: देश में कभी कहा जाता था कि दहेज लेना-देना दो पक्षाें की रजामंदी है, फिर भी दहेज आपराधिक मामला बना। सती प्रथा के खिलाफ कानून बना। मुस्लिम विवाह से जुड़े 1986 के कानून में ताकत होती तो शाह बानो को सुप्रीम कोर्ट क्यों जाना पड़ता?
मीनाक्षी लेखी: तीन तलाक पुरुष बनाम स्त्री नहीं, मानवधिकार उल्लंघन का मामला है। यह बिल सिर्फ दंडात्मक नहीं, समान रूप से मजबूत बनाने वाला है।
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