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भाजपा का फोकस 123 हारी लोकसभा सीटों पर, सौ दिन में मोदी इनके आसपास सरकारी दौरों पर जाएंगे, योजनाओं की घोषणा और शिलान्यास की रणनीति




तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भाजपा नेतृत्व को देशभर में 70-80 सीटों के नुकसान की आशंका है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व ने अगस्त 2017 में चिह्नित 123 लोकसभा सीटों पर गतिविधि बढ़ा दी है। ये वो सीटें हैं, जो 2014 के मोदी लहर में भी पार्टी नहीं जीत पाई थी। इनमें से अधिकांश सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा कभी नहीं जीती है।
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इन सीटों को 25 क्लस्टर में बांटा था और सभी पर एक-एक प्रभारी तैनात किए थे। अब भाजपा ने 2019 में नुकसान की भरपाई के लिए मिशन-123 के तहत सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतारा है। मार्च के पहले सप्ताह में जारी होने वाली चुनावी अधिसूचना से पहले यानी अब से लगभग 100 दिन में प्रधानमंत्री मोदी इन 20 राज्यों में बने 25 क्लस्टर तक सीधे पहुंच कर कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर माहौल बनाएंगे। हर राज्य में मोदी का यह दौरा सरकारी होगा, जिसमें विकास की किसी परियोजना का उद् घाटन या शिलान्यास होगा और उसके बाद जनसभा का आयोजन होगा।
मोदी के इस अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से हो चुकी है। मोदी 18 दिसंबर को मुंबई और पुणे गए थे, जहां सरकारी योजनाओं के साथ पुणे मेट्रो की आधारशिला रखी थी। इसके बाद उन्होंने क्लस्टर में शामिल कल्याण लोकसभा सीट पर जनसभा भी की थी। इसके बाद 24 दिसंबर को मोदी ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आईआईटी के नए परिसर का उद् घाटन किया था और 14500 करोड़ रुपए की सौगात राज्य को दी थी। फिर खुरदा में एक जनसभा में राज्य की नवीन पटनायक सरकार पर हमला किया था। इसके बाद 25 दिसंबर को ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे रेल-रोड बोरीबिल ब्रिज का उद् घाटन किया। अब 4 जनवरी को वे असम के ही सिलचर में जनसभा को संबोधित करेंगे। बराकवैली स्थित इस क्षेत्र में फोकस की वजह नेशनल सिटीजन रजिस्टर से होने वाले नुकसान को रोकना है। यहां बंगाली भाषी बहुसंख्यक हैं और भाजपा के मिशन-123 में शामिल लोकसभा सीट है। भाजपा का लक्ष्य असम की 14 में से 11 सीटें जीतने का है। पूर्वोत्तर की कुल 25 सीटों में से भाजपा ने मिशन-21 का लक्ष्य रखा है। जबकि 5 जनवरी को मोदी फिर ओडिशा में होंगे, जहां मयूरभंज लोकसभा क्षेत्र के बरीपदा में जनसभा को संबोधित करेंगे। ओडिशा में 16 जनवरी को भी प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित है, जहां वे बोलांगीर लोकसभा क्षेत्र में होंगे। चुनाव की तारीखों के ऐलान तक मोदी ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिणवर्ती राज्यों का दौरा करेंगे।


ओडिशा-बंगाल पर खास निगाह
भाजपा को ओडिशा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। ओडिशा की 21 में भाजपा के पास महज एक सीट है और बंगाल की 42 सीटों में से पार्टी के पास सिर्फ 2 सीटें हैं। इसलिए तीन क्लस्टर में बंटे ओडिशा में पीएम मोदी तीन बार जा रहे हैं और तटीय क्षेत्र भुवननेश्वर लोकसभा सीट के खुरदा में रैली हो चुकी है। जबकि 5 जनवरी को उत्तरी ओडिशा के मयूरभंज और 16 जनवरी को पश्चिमी ओडिशा के बोलांगीर में जनसभा करेंगे। ओडिशा भाजपा के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह कहते हैं, ‘भारतीय जनता पार्टी ओडिशा में अधिकांश सीटें जीतेगी और राज्य में भी सरकार बनाएगी, इस लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री का प्रदेश में तीन दिनी दौरा हो रहा है।’ दूसरी तरफ भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, कि ‘तीन राज्यों में तो अभी ही 31 सीटों का नुकसान दिख रहा है, जबकि बिहार में हम 29 की जगह इस बार 17 सीटों पर लड़ रहे हैं। दूसरी तरफ यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन से नुकसान होना तय है। किसी भी सूरत में 70-80 सीटों से कम का नुकसान नहीं होगा। ऐसे में भरपाई के लिए शाह ने मिशन-123 को गति दे दी है।’
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