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फिनलैंड के साथ मिलकर तलाशेंगे स्मॉग के कारण, लगेंगे हाईटेक सेंसर



नई दिल्ली.दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे स्मॉग के कारणों का पता लगाने के लिए भारत सरकार और फिनलैंड के बीच करार किया गया है। इस करार के जरिए दोनों देशों के वैज्ञानिक स्मॉग के असली कारणों का पता लगाएंगे कि आखिर पराली का धुआं स्मॉग को तैयार करने में कितना जिम्मेदार है।

इसे लेकर फिनलैंड की ओर से नई सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 बनने और उसके साथ जुड़ने वाले प्रदूषित तत्वों के सोर्स का पता लगा सकेंगे। सेंसर के जरिए डाटा एकत्र करने का काम जनवरी 2019 तक चलेगा। यह खुलासा एमडीयू में पहुंचे द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट की इनावयरमेंटल एंड इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर प्रो. बनवारी लाल ने विशेष बातचीत में किया।

अभी तक दिल्ली एनजीटी से लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हर बार स्मॉग के लिए हरियाणा और पंजाब को ही जिम्मेदार ठहराया जाता हैं। प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर प्रो. बनवारी लाल ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग और फिनलैंड की ओर से रिसर्च एंड डेवलमेंट के लिए प्रोजेक्ट दिया है।

स्मॉग व जानलेवा प्रदूषण के कारणों को तलाशने के लिए हाइटेक सेंसर का प्रयोग किया जाएगा। ये सेंसर तकनीक फिनलैंड के फिनिल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैट्रोलॉजी की ओर से उपलब्ध करवाई जा रहे है।

स्मॉग में शामिल तत्वों का चलेगा पता :
दिल्ली और एनसीआर में बनने वाले स्मॉग में शामिल प्रदूषित कणों व तत्वों की जानकारी भी इन सेंसर के जरिए जुटाई जाएगी। बाद में पॉलिसी के लिए इस डाटा को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया जाएगा। अभी तक पराली का धुआं जलने के बाद जब तक दिल्ली पहुंचता है तो उसके साथ कई अन्य प्रदूषित तत्व भी जुड़ जाते हैं।

ये एक बड़े कॉम्पलेक्स का रूप ले लेता है। इस प्रदूषित हवा में नमी और बैक्टिरिया भी शामिल हो जाते हैं। इस कारण है कि लोगों में सांस की बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं और मामूली जुकाम भी ठीक होने में कई दिन लगा देता है।

दिल्ली में 2 दिन में बढ़ सकता है प्रदूषण :

इस हफ्ते बारिश के चलते राजधानी में प्रदूषण कम होने से लोगों ने राहत ली। लेकिन अगले दो दिन खराब और बहुत खराब के बीच रहने का अनुमान है। इससे लोगों को फिर आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार तापमान गिरने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। शनिवार को दिल्ली में एक्यूआई 267 दर्ज किया गया, जो कि शुक्रवार को 285 था। वहीं, फरीदाबाद में 273, गाजियाबाद में 264, ग्रेटर नोएडा में 286, गुड़गांव में 188 और नोएडा में 275 दर्ज किया गया।

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India and Finland agreement to reduce smog in Delhi

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