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डूसिब ने 8 साल में 900 करोड़ रुपए खर्च कर 18 हजार फ्लैट बनाए, लेकिन अभी तक केवल एक हजार को ही आवंटित किया




दिल्ली को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने 8 साल में 900 करोड़ रुपए खर्च किए। इस प्रोजेक्ट के तहत अलग-अलग एरिया में करीब 18 हजार फ्लैट बनाए गए, लेकिन अभी तक सिर्फ एक हजार फ्लैट ही आवंटित किए गए हैं। ऐसे में जवाहरलाल नेहरू अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएनयूआरएम) के तहत तैयार 17 हजार फ्लैट धूल फांक रहे हैं।
द्वारका- 2000
सावदा-घेवरा- 7600
(केवल द्वारिका में ही फ्लैट आवंटित किए गए हैं, बाकी जगहों पर फ्लैट्स खाली पड़े हैं।)
सुल्तानपुरी में फ्लैट।
सुल्तानपुरी-1060
भलस्वा-7400
जेएनयूआरएम के तहत 52 हजार फ्लैट्स बने हैं
जेएनयूआरएम के तहत 52 हजार में से 18 हजार फ्लैट्स डूसिब ने तैयार किए। आवंटन को लेकर डूसिब ने सर्वे किया, लेकिन 4 जून 2009 की कटऑफ डेट के कारण झुग्गियों के सिर्फ 47% ही पात्र पाए गए। कटऑफ डेट को 1 जनवरी 2015 कर दिया गया। कटऑफ डेट यह साबित करने के लिए होती है कि कोई व्यक्ति तय तारीख से पहले से संबंधित कॉलोनी में रह रहा है। वहीं, डूसिब की झुग्गी पुनर्वास नीति भी दिसंबर 2017 में नोटिफाई हुई। इससे हुई लेटलतीफी के बाद सरकार के जहां झुग्गी वहीं मकान देने की घोषणा के बाद तैयार फ्लैटों के आवंटन की प्रक्रिया भी ठप हो गई।
1985 स्कीम के तहत सावदा-घेवरा के 7600 फ्लैट्स को आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 1 हजार के आवेदन मिले हैं। सुल्तानपुरी के फ्लैटों के आवंटन के लिए सर्वे प्रक्रिया पूरी कर ली गई। जल्द ही फ्लैटों का आवंटन कर दिया जाएगा। वहीं, कस्तूरबा नगर, रोहतक रोड, संगम पार्क, मॉडल टाउन और भलस्वा में जहां झुग्गी, वहीं मकान की योजना के तहत फ्लैटों के निर्माण का काम किया जा रहा है। – बिपिन राय, सदस्य, डूसिब
यह भी कारण सरकार ने कुछ जगह आवंटन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन आवंटी हिस्से की अंश राशि देने को तैयार नहीं हुए। इससे फ्लैटों का आवंटन टल गया। दरअसल, प्रोजेक्ट के तहत अधिकतर मकान बाहर के क्षेत्र में बने हैं।
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New Delhi News – deutsche spent 900 million rupees in 8 years and built 18 thousand flats but till now only allocated one thousand

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